श्री मदनदासजी देवी

नागर समाज केगौरव
श्री मदनदास जी देवी (करमाला)

मां भारती के प्रति समर्पित, रोम रोम में राष्ट्रप्रेम ,राष्ट्रीयता व देश भक्ति।
हिंदू समाज को संगठित कर संस्कार संस्कृति व सभ्यता के प्रचार प्रसार हेतु अपना पूरा जीवन न्योछावर करने वाला ऐसा व्यक्तित्व जिसका नाम भारत के *महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रीगण बड़े बड़े राजनीतिज्ञ व उच्च पदों पर बैठे प्रशासनिक अधिकारी भी आदर से लेते हैं और जिनके प्रति दिल से आत्मीयता रखते है , करमाला के *सपूत,समाज के गौरव, समाज को यश कीर्ति दिलाने वाले।
आदरणीय श्रद्धेय
🌸श्री मदनदासजी देवी 🌸
78 वर्षीय श्री मदनदासजी देवी का जन्म महाराष्ट्र के छोटे से गांव करमाला के मध्यम परिवार में हुआ ।आप की प्रारंभिक शिक्षा करमाला में हुई तथा आपने बी. कॉम., एल. एल. बी.,सी.ए, की उच्च शिक्षा मुंबई व पुणे में प्राप्त की।
आपको सात भाषाओं का ज्ञान है। पुणे में शिक्षा के दौरान आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। यहीं से आपको हिंदू समाज को संगठित करने व इसके प्रचार प्रसार का विचार मन में आया। अब आपके जीवन का लक्ष्य सिर्फ संगठित हिंदू समाज व उसका निर्माण करना था ।
25 वर्ष की उम्र में आपने घर परिवार छोड़कर राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रचारक बन गए। इसके पश्चात आप मध्य प्रदेश,विदर्भ व महाराष्ट्र के राष्ट्रीय स्वयं संघ के संगठन मंत्री बने ।पूरा संगठन आपके त्याग, समर्पण, विचारों व कार्यशैली से प्रभावित था, जिसके फलस्वरूप आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बने। आपने हिंदू समाज को एकजुट रखने के लिए लगभग पूरे विश्व का भ्रमण किया और आप इसमें सफल भी रहे ।
आपने संघ के प्रचारक के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री अटल बिहारी बाजपेई व वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रजी मोदी के साथ लंबे समय तक कार्य किया। प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के समय आप सत्ता व संगठन के मध्य एक सेतु का कार्य करते थे, आपको संकटमोचक के रूप में जाना जाता था। आपने कभी किसी पद को न स्वीकारते हुए संघ के कार्य को ही प्राथमिकता दी व अपने पुरुषार्थ से आपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह के दायित्व को सुशोभित किया। वर्तमान में आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता फिर भी आप आज भी संघ का कार्य करते हैं तथा संघ द्वारा आपको अखिल भारतीय स्तर की बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है।
यह भी ज्ञात हुआ है कि आपने अपनी पूरी संपत्ति संघ को समर्पित कर दी तथा वर्तमान में आप बेंगलुरु में निवास करते हैं व संघ का कार्य करते हैं । आज भी आप से आत्मीयता रखने वाले आदरणीय श्री रामनाथजी कोविंद श्री मोदी जी,श्री ओमजी बिड़ला,संघ के पदाधिकारी भारत शासन के मंत्री गण उच्च पदों पर बैठे प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर आपके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हैं।
वर्ष 2002 में संपन्न हुए अखिल भारतीय श्री विशानागर वणिक समाज के महा अधिवेशन में आप मुख्य अतिथि थे। आपने नागर समाज का नाम गौरवान्वित किया है , करमाला की माटी का मान बढ़ाया है। आपके माता पिता को वंदन, आपका अभिनंदन, समाज को ऐसे व्यक्तित्व पर गर्व है जिसने समाज को गौरव दिलाया, यश कीर्ति दिलाई, मान बढ़ाया।
समाज को आप पर गर्व है