सेवा · संस्कार · सहकार · संगठन — संपूर्ण भारत में फैले हमारे समाज बंधुओं को एक सूत्र में पिरोने की अभूतपूर्व यात्रा की कहानी।
जिस प्रकार अथाह समुद्र में असंख्य जल कण होते हैं, किन्तु उनमें से कुछ ही जल कण सीप में समाकर मोती का रूप धारण करते हैं — ठीक उसी प्रकार भारत वर्ष रूपी जल समुद्र में श्री जी कृपा से श्री विशा नागर समाज रूपी जल कण, सेवा संस्कार सहकार एवं संगठन रूपी सीप में समाकर अखिल भारतीय श्री विशा नागर समाज रूपी अमूल्य मोती का रूप धारणकर आज अपनी आभा प्रकट कर रहा है।
आज के इस युग में अर्थ के मूल्य के साथ-साथ समय का मूल्य भी कम नहीं है। इस संस्था के निर्माण में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कई ज्ञाति बंधुओं ने कठिन परिश्रम किया है एवं कर्मठ कार्यकर्ताओं ने इस कल्प वृक्ष को अपने-अपने माध्यम से सींचा है, और आज यह विशाल वट वृक्ष का रूप लेकर आपके सम्मुख है।
संस्था द्वारा वर्तमान में संचालित स्थाई सेवा कोष हेतु आप सभी अपने सामर्थ्य अनुसार श्रद्धा निधि के साथ-साथ तन मन एवं धन से सहयोग करें। वर्तमान में इस कोष के माध्यम से हम उन ज्ञाति बंधुओं की सेवा कर रहें हैं जो धन के अभाव में रोगों का उपचार नहीं करवा सकते हैं तथा भविष्य में इसी के माध्यम से शिक्षा व आर्थिक सहायता भी प्रदान करने जा रहे हैं।
यह सहयोग ठीक वैसे ही देना है, जैसे भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा को सहयोग दिया था — अर्थात हम सहयोग तो दें, पर लेने वालों को मालूम ही न पड़े कि किसने सहयोग दिया। तभी "दुख में दर्द न होने" की अखिल भारतीय विशा नागर समाज की मूल भावना सार्थक होगी।
विभिन्न नगरों के ज्ञाति बंधुओं को एक-दूसरे के नजदीक लाने एवं अखिल भारतीय स्तर पर मजबूत संगठन के उद्देश्य से आयोजित। मुख्य अतिथि श्री मदनलाल नागर (इन्दौर) रहे। करीब 1600 से अधिक बंधुओं ने भाग लिया। श्रीनाथजी के मंदिर की ऐतिहासिक परिक्रमा, प्रथम मिलन स्मारिका का विमोचन एवं मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
विशा नागर महाजन वाड़ी पूना में प्रथम परिचय पत्रिका का महिमापूर्ण वातावरण में विमोचन हुआ। पत्रिका में 350 विवाह योग्य कुंवारे लड़के-लड़कियों का विवरण सहित छायाचित्र प्रकाशित हुए — जिससे पालकों के समय एवं अर्थ की बचत हुई। जाति बंधुओं ने अपार विश्वास प्रकट किया।
उपाध्यक्ष श्री रमणभाई पारेख (संयोजक) के नेतृत्व में भव्य सामूहिक विवाह आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न नगरों के 11 वर एवं 11 वधू विवाह सूत्र में बंधे। ठहरने, औढ़ने, बिछाने, भोजन-नाश्ते की समूचित व्यवस्था धर्मशालाओं व कॉटेज में की गई। प्रभु श्रीनाथजी की कृपा से सारे कार्यक्रम निर्विघ्न सम्पन्न हुए — मील का पत्थर।
दूसरी चयनिका (कुंवारे लड़के-लड़कियों की जानकारी पत्रिका) का विमोचन 27 जनवरी 2002 को नासिक में हुआ। द्वितीय महाधिवेशन इन्दौर में आयोजित हुआ जिसमें 1100 लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर स्मारिका 'मधुर मिलन' का विमोचन किया गया तथा 2004 में 'मनभावन' पत्रिका प्रकाशित हुई।
अखिल भारतीय श्री विशा नागर वणिक समाज द्वारा बुरहानपुर में तृतीय महाधिवेशन का आयोजन किया गया। तृतीय अधिवेशन अपने आप में संस्था की सफलता व विकास यात्रा का घोतक है — जो आज भी हमें एकता एवं सेवा के पथ पर अग्रसर रखता है।
इन्दौर, म.प्र.
इन्दौर, म.प्र.
इन्दौर, म.प्र.
इन्दौर, म.प्र.
समस्त नगरों में स्थित समाज के स्थानीय समाज को संस्था से जोड़ना एवं अखिल भारतीय स्तर पर एक मजबूत एवं लोकतांत्रिक संगठन बनाना। समस्त जाति बंधुओं में एक्य भाव का प्रचार करना।
समाज के मुख्य रीति-रिवाजों में एकरूपता लाना, सामूहिक लग्न एवं परिचय सम्मेलन कराना एवं खर्चों को कम करने में सहयोग करना।
समाज के असहाय बंधुओं एवं महिलाओं की यथा संभव मदद करना, स्वास्थ्य सेवा का विस्तार करना एवं जरूरतमंद को आकस्मिक चिकित्सा सेवा में सहायता करना।
छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षण की ओर प्रेरित करना तथा जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना — विना किसी जातिभेदभाव के।
समाज के सदस्यों के लिए रोजगार के अवसर एवं आर्थिक उन्नति हेतु मदद करना, हस्तशिल्प एवं गृह उद्योग हेतु महिलाओं व बालिकाओं को प्रोत्साहन देना।
समाज के प्रतिभाशाली लोगों का उचित सम्मान करना, सामाजिक शिक्षण एवं अच्छे संस्कारों का प्रचार करना एवं व्यक्तित्व विकास हेतु पत्र-पत्रिकाएँ निकालना।
आपका सुझाव, सहयोग एवं श्रद्धा निधि हमारे लिए अत्यंत मूल्यवान है। हमें संदेश भेजें — हम शीघ्र ही आपसे संपर्क करेंगे।